Bonded labourers rescued during second wave of Covid-19 amid lockdown

दिनांक 19 मई, 2021

"कोरोना महामारी की दूसरी लहर और बरसती बारिश में मुक्त हुए बंधुआ मजदूर"

"लॉक डाउन में मजदूरों का बुला हाल सरकार ले सुध"

वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान देश में लगे पहले लॉकडाउन ने मजदूरों को भरी आर्थिक संकट में डाल दिया। इसी वजह से ईट भट्ठा मजदूर के परिवारों को मजबूर होकर माह नवंबर 2020 में रोजी-रोटी की तलाश में अपनी जान की परवाह न करते हुए रूबी ईंट पर जाना पड़ा और अपने आप को गुलाम बनने पर मजबूर होना पड़ा।

देश भर में असंगठित मजदूरों के साथ कार्यरत संगठन बंधुआ मुक्ति मोर्चा को ईट भट्टा मजदूर दानिश ने बताया कि वह अपने परिवार एवं अन्य 4 परिवारों के साथ खाने कमाने के लिए किसी की मदद से रूबी ईट भट्टा, मारका गगन, गांव बजेरी, न्यू मंडी पुलिस थाना, तहसील सदर मुजफ्फरनगर पर गया।  यह मजदूर गांव सिकरेड़ा, तहसील मुजफ्फरनगर के लगभग 7 परिवार के संख्या में 30 से भी ज्यादा थे जो की 4 परिवार सहित ईट बनाने का काम कर रहे थे किंतु प्राथमिक नियोक्ता एवं उसके गुंडों ने मजदूरों को कोरोना की महामारी की दूसरी लहर के दौरान लगे लॉकडाउन में पेट भरने के लिए भोजन तक नहीं दिया और मालिकों ने मजदूरों से काम लेना जारी रखा । मजदूरों द्वारा बार-बार मजदूरी मांगने पर मालिक का कहना होता कि मजदूरी दे दी जाएगी पहले काम खत्म करो।

 मजदूर रूबी ईट भट्टे पर काम करने के बिल्कुल भी इच्छुक नहीं थे किंतु मालिक मजदूरों को कार्य स्थल से घर जाने से रोक रहा था। मजदूरों ने कई बार मालिक को हिसाब करने के लिए बोला किंतु मालिक ने हर बार किसी न किसी तरीके से मजदूरों को उनके घर जाने से रोका।

अंतिम में माह अप्रैल के अंत में जब मजदूर उनकी मजदूरी न मिलने के कारण अत्यंत परेशान होने लगे तब उन्होंने बंधुआ मुक्ति मोर्चा का दरवाजा खटखटाया। बंधुआ मुक्ति मोर्चा को मिली जानकारी के आधार पर संगठन की ओर से जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर को एक शिकायत पत्र कंप्लेंट के माध्यम से दिनांक 9 मई, 2021 को ईमेल के थ्रू भेजा गया। किंतु प्रशासन ने उसके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं की फिर से दो अलग-अलग स्मरण पत्र माह मई में ईमेल के माध्यम से दिनांक को प्रेषित किए गए।

बंधुआ मुक्ति मोर्चा के जनरल सेक्रेटरी निर्मल गोराना ने दिनांक 17 मई 2021 को जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर को फोन कर बंधुआ मजदूरों को तत्काल रिहा करने की गुहार लगाई।

जिलाधिकारी के आदेश पर अतिरिक्त जिलाधिकारी एवं उप खंड अधिकारी सदर के प्रयास से एक टीम गठित की गई जो बंधुआ मजदूरों के मुक्ति हेतु दिनांक 19 मई 2021 को रुबी ईट भट्टा गांव बजरी पहुंची। जब प्रशासन की टीम तहसीलदार, लेबर ऑफिसर एवं बंधुआ मुक्ति मोर्चा के विनोद कुमार, ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क की एडवोकेट जोइसी मिलन जाऊ एवं एक्शन एसोसिएशन के कमर खान की टीम के साथ रूबी भट्टे पर छापा मारा तो अचानक रेस्क्यू टीम को देखकर मालिक मौके से फरार हो गया।

टीम ने बंधुआ मजदूरों के बयान दर्ज किए। दर्ज बयान के अनुसार कुछ मजदूर मालिक के डर से ईंट भट्टे से बिना मजदूरी लिए ही भाग गए। मालिक मजदूरो से जबरन काम ले रहा था एवं मजदूरों को उनके घर जाने से रोक रहा था। रुबी भट्टे में बच्चे कार्यरत थे। एडवांस देकर मजदूरों से जबरन काम लेना एवं मजदूरों के रोजगार में स्वतंत्रता ना होना ही किसी भी कार्यस्थल पर बंधुआ मजदूरी प्रथा उन्मूलन अधिनियम 1976 का घोर उल्लंघन है ।

बंधुआ मुक्ति मोर्चा के जनरल सेक्रेटरी निर्मल गोराना ने बताया कि तत्काल सभी मजदूरों को पुलिस संरक्षण के साथ मुक्ति प्रमाण पत्र देकर उनके निवास स्थान पर भेजना चाहिए और श्रम विभाग को त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी मजदूरों के वेतन को तत्काल भुगतान करवाने का प्रयास करना चाहिए ताकि लॉक डाउन के दौरान मजदूर भूख का शिकार ना हो।
जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर को तत्काल ही ₹20000 की सहायता राशि एवं मुक्ति प्रमाण पत्र प्रति बंधुआ मजदूर को प्रदान करना चाहिए ताकि वह अपने स्वतंत्र जीवन की शुरुआत कर सके।

इसी क्रम में निर्मल गोराना ने उत्तर प्रदेश की सरकार से अपील की है कि उत्तर प्रदेश में सक्रिय समस्त भट्टो पर मजदूरों की एक बार सुध लेने की आवश्यकता है एवं उन्हें सामाजिक सुरक्षा के रूप में ₹10000 मुहैया करवाया जाए ताकि लोक डाउन के चलते उनको परेशानी ना आए। साथ ही उत्तर प्रदेश की सरकार कोरोना से मुक्ति के लिए वैक्सीन लगवाने का अभियान चला रही है जिसमें ईट भट्टा मजदूर परिवारों को प्राथमिकता दी जाए जो कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े है।